1988 की सबसे बड़ी हॉरर फिल्म ‘वीराना’ से जुड़ा ये मामला जानकर फिर रोंगटे हो जायेंगे खड़े!

1988 की सबसे बड़ी हॉरर फिल्म ‘वीराना’ से जुड़ा ये मामला जानकर फिर रोंगटे हो जायेंगे खड़े!

वीराना महज एक फिल्म का नाम नहीं है बल्कि ये यादों की वो अलमारी है जिसमें बचपन के कई किस्से दफ्न हैं. खासतौर से उस दौर के बच्चे जिनका जन्म 90 के दशक में हुआ. जैसे ही ये नाम लिया जाता है वो किस्से भी ताजा हो उठते हैं जो इस फिल्म से जुड़े हैं. वो डर भी जिंदा हो जाता है जो इस फिल्म के हर सीन में महसूस हुआ करता था. 1988 में रिलीज वीराना हिंदी सिनेमा की सबसे डरावनी फिल्म मानी जाती है. लेकिन क्या ये फिल्म किसी सच्ची घटना से प्रेरित होकर बनाई गई थी?

जब फिल्म के निर्देशक के साथ हुई ये डरावनी घटना
वीराना फिल्म बनी 1988 में लेकिन उससे ठीक 5 साल पहले यानि 1983 में फिल्म निर्देशक श्याम रामसे के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसे वो कभी भी अपने दिलों दिमाग से निकाल ही नहीं सके. हुआ ये था कि श्याम रामसे 1983 में अपनी फिल्म पुराना मंदिर की शूटिंग के लिए महाबलेश्वर में थे. जब शूटिंग पूरी हो गई तो पूरी टीम वापस आ गई लेकिन श्याम रामसे वहीं रुक गए. कुछ दिन रुकने के बाद जब वो देर रात महाबलेश्वर से निकले तो रास्ते में एक महिला ने उनसे लिफ्ट मांगी. लिफ्ट देने के बाद श्याम रामसे महिला से बात करने की कोशिश करते रह लेकिन वो महिला बेहद अजीब थी और मुंह शीशे की तरफ किए ही बैठी रही. तभी श्याम रामसे की नजर महिला के पैरों पर पड़ी तो उनके होश ही उड़ गए. उस महिला के पैर उलटे थे. उन्होंने जैसे ही घबराकर ब्रेक लगाया तो देखा कि वो महिला अचानक से अंधेरे में गायब सी हो गई. इस घटना से श्याम रामसे काफी डर गए थे।

किताब में किया गया है इस घटना का जिक्र
फतेहचंद रामसे की नातिन अलीथा प्रीती कृपलानी ने जो किताब लिखी उसमें इस घटना का जिक्र किया गया है जो श्याम रामसे के साथ घटी थी. कहा जाता है कि इस घटना को वो कभी भुला नहीं सके और इसी से प्रेरित होकर उन्होंने वीराना बनाई थी।

Bolly News

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