पीलीभीत : सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों पर ओटीटी और मल्टीप्लेक्स का ‘ग्रहण’, अब ये शहर बना ठिकाना

पीलीभीत : सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों पर ओटीटी और मल्टीप्लेक्स का ‘ग्रहण’, अब ये शहर बना ठिकाना

पीलीभीत. एक दौर था जब युवा हों, चाहें बुजुर्ग, सभी अपने मनोरंजन के लिए फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों तक जाया करते थे. इस बीच ओटीटी (OTT) के बढ़ते चलन और बड़ी मल्टीप्लेक्स कम्पनियों की चकाचौंध के चलते छोटे शहरों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों पर ताले लटक चुके हैं. पीलीभीत की बात करें तो शहर में चार, तो वहीं अन्य कस्बों को मिलाकर कुल 10 सिनेमाघर हुआ करते थे, लेकिन आज की तारीख में इनमें से एक भी संचालित नहीं हो रहा है. शहर के चारों सिनेमा हॉल पर ताला लटक चुका है, तो उनके भवन जर्जर हो चुके हैं. सिनेमाघरों के मालिकों ने भी अन्य व्यवसाय शुरू कर दिया है. शहर के लोग अब फिल्म देखने के लिए बरेली स्थित मल्टीप्लेक्स का रुख करते हैं.

शहर के वरिष्ठ पत्रकार साकेत सक्सेना ने NEWS 18 LOCAL से खास बातचीत में बताया कि एक दौर में सिनेमाघरों से फिल्म छूटने के बाद काफी रौनक हुआ करती थी. दूरदराज के गांवों से आए लोग फिल्म देखने के बाद बाजार जाया करते थे जिससे कई रिक्शा चालकों का रोजगार जुड़ा था. वहीं, सिनेमाघरों के आसपास कैंटीनों की भरमार हुआ करती थी.सिनेमाघर बन्द होने से उनका व्यवसाय भी ठप हो गया है.

मोबाइल है बड़ा कारण
पीलीभीत के रहने वाले कुलदीप बताते हैं कि अब लोगों के पास मनोरंजन के लिए अन्य साधन उपलब्ध हैं. जब चाहें तब अपने मोबाइल पर ही फिल्में देख सकते हैं, तो ऐसे में लोगों का रुझान सिनेमाघरों से हटकर मोबाइल पर आ गया है. इसीलिए कस्बों और छोटे शहरों के सिनेमाघर धीरे-धीरे बन्द हो रहे हैं.

वक्त के साथ नहीं बदले छोटे सिनेमाघर
पीलीभीत के रहने वाले बिलाल मियां बताते हैं कि सिनेमाघरों में बदलते जमाने के साथ सुधार न होना एक बड़ा कारण बन गया. सिनेमाघरों के मालिकों ने पुराना रवैया अपनाए रखा. वहीं, बड़े मल्टीप्लेक्स कम्पनियों ने ऑडियो-वीडियो समेत लोगों के कम्फर्ट को भी बेहतर बनाया.

ankita patel

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